मसीही जीवन एक त्याग

 आज दुनिया भर में लाखो लोग है जो यीशु मसीह की सेवा कर रहे हैं और कुछ लोगो ने अपनी जान भी गवा दी है. यीशु मसीह की सेवा करना शौक है या आज्ञा आइए बाइबल से जानते हैं यीशु मसीह मत्ती 28 में कहते हैं, इसलिये तुम जाकर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। तो क्या परमेश्वर की सेवा करना आसान है। आइए जाने ,बाइबल में जब हम अब्राहम के बारे में पढ़ते हैं तो परमेश्वर ने अब्राहम से कहा, उत्पत्ति 12:1 यहोवा ने अब्राम से कहा, अपने देश, और अपनी जन्मभूमि, और अपने पिता के घर को छोड़कर उस देश में चला जा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। जब परमेश्वर ने अब्राहम से कहा तो सच में अब्राहम ने अपने पिता के घर और समाज को त्यागकर निकला और जब अब्राहम घर छोड़ा तब वह 75 साल का था इस उम्र में उसको बहुत परेशानी हुई होगी लेकिन परमेश्वर की आज्ञा मानकर और विश्वास के साथ निकला। उसके बाद जब बाइबल में हम अय्यूब के बारे में पढ़ते हैं तो अय्यूब के पास, अय्यूब 1:2 उसके सात बेटे और तीन बेटियां उत्पन्न हुई। 3 फिर उसके सात हजार भेड़-बकरियां, तीन हजार ऊंट, पांच सौ जोड़ी बैल, और पांच सौ गदहियां, और बहुत ही दास-दासियां थीं; वरन उसके इतनी सम्पत्ति थी, कि पूरबियों में वह सब से बड़ा था। लेकिन कुछ ही समय में उसका सबकुछ बर्बाद हो गया, शैतान ने उसको इतना परेशान किया लेकिन उसने परमेश्वर की आज्ञा माना और परमेश्वर के लिए उसने सब कुछ त्याग दिया जबकि आज हम अपने कमाई का दसवां अंश भी देने में सोचते हैं, फिर अय्यूब ने कहा अय्यूब 1:21 मैं अपनी मां के पेट से नंगा निकला और वहीं नंगा लौट जाऊंगा; यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है। इतनी बड़ी हानि होने बाद भी उसने परमेश्वर के विरुद्ध कोई पाप नहीं किया और परमेश्वर के लिए सब कुछ त्याग दिया। उसके बाद जब हम बाइबल में हन्ना के बारे में पढ़ते हैं तो हन्ना बांझ थी और उसने परमेश्वर के भवन में प्रार्थना की इसके बाद उसको एक बेटा हुआ और उसने अपने मन्नत के अनुसार दूध छूटने के बाद हन्ना अपने बेटे को यहोवा के भवन में अर्पण कर देती हैं, जबकी बहुत दिन बाद उसको एक बेटा हुआ था और बेटे की उम्र भी ज्यादा नहीं थी लेकिन उसने परमेश्वर के लिए अपने बेटे को त्याग दिया जबकि आज के समय में हम अपने बच्चो को चर्च ले जाने में भी सोचते हैं। बाइबल में जब हम पौलुस के बारे में पढ़ते हैं तो उसने परमेश्वर की सेवा के लिए स्त्री त्याग दिया ऐसे कई उदाहरण है जिन्होंने परमेश्वर की सेवकाई के लिए कुछ न कुछ त्याग किया है। आज के समय में यदि हम सेवक हैं तो हमको यह जानना जरूरी है की परमेश्वर हमसे क्या त्याग चाहता है। अगर हम भारत में है और परमेश्वर की सेवा करना चाह रहे हैं तो हमे भी कुछ त्याग करना पड़ेगा । भारत में अधिकतर लोग हिंदू समाज से मसीही बन रहे हैं जिसमे बहुत से लोग बहुजन समाज( विशेष दलित)से है और जो हिंदू बहुजन है जिनको भारत में काफी आरक्षण मिलता है इसी कारण से बहुत लोग आज कागजी तरीके से मसीही नही बन पा रहे हैं, क्या आज हम यीशु के लिए जिसने हमारे पापों के लिए अपने आपको को बलिदान कर दिया हम आरक्षण को नही त्याग सकते । मसीही बनने के बाद बहुत से लोग आपको शायद इज्जत न दे तो क्या हम यीशु के लिए इस सम्मान को नही त्याग सकते।अगर हम एक सेवक हैं तो हमे ये जानना जरूरी है कि परमेश्वर हमसे क्या त्याग चाहता है ताकि हम परमेश्वर के अनुसार अपना जीवन बिता सके।

                                                              अरविंद कुमार

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नफरत की सच्चाई

बाइबल और शिक्षा

सच जानना चाहिए