नफरत की सच्चाई
आज के हिंदू ईसाइयों से क्यों नफरत करते है,भारत देश में ईसाई धर्म कोई नया नहीं है ये भारत में 2 हजार साल पुराना है, भारत के कई राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ईसाई स्कूलों में पढ़े है,ईसाई समाज ने भारत को अच्छे स्कूल दिए हैं,ईसाई समाज ने भारत को कई अच्छे अस्पताल दिए हैं,भारत आज तकनीकी के क्षेत्र में आगे जा रहा है उसमें ईसाई समाज का बहुत बड़ा योगदान है,भारत में करोड़ों हिंदू अंग्रेजी सीखकर भारत और दुनिया में नौकरी कर रहे हैं वो ईसाई समाज की देन है,भारत का संविधान लिखते समय डॉ अंबेडकर ने ईसाई देशों के संविधान पढ़कर भारत का संविधान लिखा,लेकिन फिर भी ईसाइयों से हिंदू(ब्राह्मण)क्यों नफरत करते हैं हिंदू धर्म के अनुसार ब्रम्हा ने चार वर्ण बनाए चौथा वर्ण शूद्र था जिसे कई अधिकारों से वंचित रखा गया था लेकिन आज के समय में वो सब अधिकार दलित के पास है तो क्या आज दलित का विरोध नहीं होता है, बिल्कुल होता है लेकिन कौन करता है वो है हिंदू (ब्राह्मण),आइए जानते हैं कि हिंदू ईसाइयों का विरोध क्यों करते है। क्या आपने कभी देखा है कि किसी ईसाई ने दलित के आरक्षण का विरोध किया! नहीं,क्या ईसाई ने कभी भारतीय संविधान को फाड़ा! नहीं,क्या कभी किसी ईसाई ने डा अंबेडकर की मूर्ति तोड़ी! नहीं,क्या कभी किसी ईसाई ने sc st एक्ट का विरोध किया! नहीं,क्या कभी किसी ईसाई ने किसी दलित के बारात को रोका! नहीं,क्या कभी किसी ईसाई ने किसी दलित के ऊपर पेशाब किया! नहीं,क्या कभी किसी ईसाई ने किसी दलित को जाती के कारण जिंदा जलाया! नहीं,क्या किसी दलित को मूंछ रखने पर किसी ईसाई को परेशान हुई!नहीं,यही नहीं बहुजन समाज में जन्मे ज्योतिबा राव फुले और उनकी पत्नी को ईसाई समाज ने ही पढ़ाया है, लेकिन दुख की बात है यह है कि उसका विरोध भी हिंदू समाज ने किया और स्कूल खोलने पर ज्योतिबा राव फुले को ब्राह्मणों ने पीटा था।इसीलिए हिंदू ईसाइयों का विरोध करते हैं,और आज भी दलितों का अधिकार ईसाई नहीं हिंदू खा रहा है इसीलिए दलित भाइयों को यह समझान चाहिए कि असली दुश्मन हमारा कौन है वरना हम पहले भी मार खाते थे आज भी मार खा रहे हैं और आगे भी मार खाएंगे।
अरविंद कुमार

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें