हम पिछड़े क्यों है !

 

आज हमारे भारत देश में आए दिन रोज दलित समाज के ऊपर अत्याचार बढ़ रहा है कभी सुनने को मिलता है की दलित घोड़ी पर चढ़ने पर, कभी लंबी मूछ रखने पर,कभी मंदिर में प्रवेश करने पर, कभी स्कूल में, ऐसा क्यों , क्या भारत में दलित समाज की जनसंख्या कम है नही! क्या दलित पढ़े लिखे नही है नही!क्या दलित के पास संगठन नही है नही!क्या दलित धार्मिक नही है नही! जबकि ये सब बाते दलितों के पास है । तब इनके साथ अत्याचार करने वाला कौन है, हम सब जानते हैं की पिछले हजारो साल से दलितों को पढ़ने का अधिकार नहीं था, धन रखने का अधिकार नहीं था, पूजा ,पाठ, यज्ञ ,हवन करने या करवाने का अधिकार नहीं था, हिंदू धर्म के अनुसार मनुष्यो का जन्म उनके कर्म के आधार पर हुआ जिसमें दलित को चौथा वर्ण अर्थात शुद्र कहा गया जिनको ईश्वर ने दुनिया में सभी वर्ण के लोगो को सेवा करने के लिए भेजा है, उस समय से दलितों के जीवन में कहीं प्रेम से, कही जबरजस्ती, कही छल कपट,कही ईश्वर का डर दिखाकर बताया गया की आपको ईश्वर ने सेवा के लिए इस दुनिया में भेजा है तब से दलितों के मन में यही आ गया और बहुत से लोगो ने मान भी लिया। और इस कारण से पिछले हजारों साल से दलितों के ऊपर अत्याचार हो रहा है लेकिन जब भारत में अंग्रेज आए तो बहुत से अधिकार दलितों को मिले, कुछ दिन बाद जब डा अंबेडकर का जन्म हुआ तो उन्होंने अच्छी शिक्षा ली और इस अत्याचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और उन्होंने बड़ी सभा में इस अत्याचार से छूटने के लिए हिंदू धर्म को त्यागकर बौद्धधर्म ग्रहण किया उनके बाद आज भारत में करोड़ों लोग अपने आपको बौधिष्ठ कहते हैं, लेकिन सच्चाई यह है की वे बौद्ध धर्म को ग्रहण ही नहीं किए है आज पूरे देश में बहुत से ऐसे लोग है जो अपने आपको बौधिष्ठ कहते है समाज को बौद्ध धर्म को ग्रहण करने के लिए कहते हैं लेकिन उनकी पत्नियां देवता उठाई है, उनके घर दिवाली मनाई जाती है, होली मनाई जाती है शादी विवाह में हिंदू धर्म का अच्छे से पालन होता है, एक कहानी से जानते से है। एक दिन मेरे घर में एक जाने माने बौधिष्ठ अपने बेटे का निमंत्रण लेकर आए जब मैने शादी का कार्ड देखा तो उसमे पूरा बौद्ध धर्म और डा अंबेडकर से संबंधित बाते लिखी थी तो मुझे लगा की पूरी शादी बौद्ध रीति रिवाज से होगी जब शादी का दिन आया तो मैं उनके यहां निमंत्रण में गया वहा पर हिंदू रीति के अनुसार एक बॉस गड़ा था लेकिन उसमे बौद्ध धर्म का झंडा लगा था, दुल्हा नहलाया जा रहा था उसके बाद कपड़ा पहनाया गया, उसके बाद गांव में जितना भी हिंदू मंदिर है सबके सामने दर्शन कराया गया,पूजा पाठ के बाद दुल्हा बारात लेकर लड़की के घर पहुंचा तो उधर से हिंदू रीति के अनुसार एक आदमी हांडी लेकर बारात के चारों तरफ घुमा फिर कही ले जाकर रख दिया थोड़ी देर बाद बारात के साथ लड़का, लड़की के दरवाजे पर पहुंचा और सामने एक मंडप बना था जिसमे भगवान बुद्ध और डा अंबेडकर की फोटो रखी थी और वहा पर एक बौधिष्ठ थे। लड़का गाड़ी से उतरकर मंडप में बैठा, लड़की भी आई पूरी शादी भंते ने बौद्ध धर्म रीति से कराई इसके बाद भंते ने शादी के बाद लोगो से कहा की हमे देवी देवता को नही पूजना चाहिए हमें बौद्ध धर्म को ग्रहण करना चाहिए और बहुत सी बातें देवी देवताओं के विषय में कही , जबकि वह दुल्हा खुद मंदिर में दर्शन के बाद ही बारात लाया है और वह लड़का पहले से ही हिंदू रीति रिवाज से सामूहिक शादी में भाग ले चुका है । सच्चाई यह है की आज दलित, शादी बौद्ध धर्म से इसलिए नहीं कर रहे हैं की वह बौशिष्ठ है बल्कि बौद्ध धर्म से शादी इसलिए कर रहे है की क्योंकि भंते जी कम पैसे में शादी पढ़ देते हैं वही किसी ब्राह्मण को बुलाते तो बहुत सारा पैसा लगता। आज यही कारण है की भारत मे दलितों की जनसंख्या बहुत है फिर भी इनके हाथ में सत्ता नहीं है क्योंकि इनका कोई एक धर्म नहीं है जब तक एक राह पर नहीं चलेंगे तब तक उनके साथ ऐसा ही अत्याचार होता रहेगा।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

नफरत की सच्चाई

बाइबल और शिक्षा

सच जानना चाहिए