गरीबों के साथ धोखा




भारत देश में आज बहुत से ऐसे लोग हैं जो ईसाइयों का विरोध करते हैं पिछले 10 सालों में 2000 से ज्यादा मसीही प्रार्थना सभा पर हमला किया गया पादरियों को मारा गया पीटा गया बाइबल को फाड़ा गया और जलाया गया, बहुत से पादरियों को झूठा केस लगाकर उनको जेल में डाल दिया गया आखिर यह कौन करता है क्या गरीब लोग, नहीं! लेकिन गरीब उनका साथ जरूर देते हैं क्योंकि उनके पास इसका कोई ज्ञान नहीं है जितने भी घटनाएं आज हो रही हैं सारे पावरफुल वाले लोग करते हैं जिसका किसी बड़े नेता से संबंध हो और जो अमीर हो जिसके पास बहुत सारा पैसा है लेकिन क्या ये सच में अमीर लोग या बड़े नेता ईसाइयों से नफरत करते हैं भारत देश में बहुत से ऐसे क्रिश्चियन कॉलेज हैं जिनमें बड़े-बड़े हिंदू नेताओं के बच्चे पढ़ते हैं बड़े-बड़े हिंदू उद्योगपतियों के बच्चे पढ़ते हैं भारत देश के अधिकतर प्रधानमंत्री क्रिश्चियन स्कूल में पढ़े हैं भारत देश के कुछ ऐसे हिंदू बड़े नेता हैं जिनके बच्चे विदेशी ईसाई स्कूलों में पढ़ रहे हैं फिर यह विरोध क्यों करते हैं सच यह है कि गरीबों को धोखा देना चाहते हैं यह खुद विरोध नहीं करते लेकिन सत्ता पाने के लिए अपना नाम कमाने के लिए ईसाइयों का विरोध करते हैं, और कहते हैं कि भारत हमारा देवभूमि है दुनिया का सबसे अच्छा देश है लेकिन पिछले कई सालों में लाखों बड़े हिंदू जिनके पास बहुत सारा पैसा है वह भारत देश छोड़कर ईसाई देश में बस रहे हैं फिर विरोध क्यों करते हैं, इसलिए क्योंकि पिछले 200 सालों में बहुत से ऐसे बहुजन समाज के नेता है जो गरीब थे लेकिन ईसाइयों के साथ में रहकर उन्होंने अपने समाज के लिए बड़ा अच्छा काम किया है, जैसे ज्योतिबा राव फुले और उनकी पत्नी की पढ़ाई ईसाई स्कूलों में हुआ है और उन्होंने बहुजन समाज के लिए बहुत बड़ा काम किया। दूसरा डॉक्टर अंबेडकर की अधिकतर पढ़ाई ईसाई स्कूलों में हुआ है और उन्होंने अपने समाज के लिए बड़ा काम किया है यह बात आज के बड़े हिंदू नेता को पता है कि अगर कोई गरीब, ईसाइयों की चर्च में जाएगा तो वह डॉक्टर अंबेडकर या ज्योतिबा राव फुले बन सकता है इसी कारण से आज बहुत से लोग गरीबों को ईसाइयों के पास नहीं जाने देना चाहते वह कहते हैं ईसाई पैसा देकर गेहूं चावल देकर धर्म परिवर्तन करते हैं अगर ईसाई इतने खराब है तो बहुत से हिंदू ईसाइयों के संसाधन को क्यों इस्तेमाल कर रहे हैं ईसाई देश में क्यों बस रहे हैं ईसाई शिक्षा क्यों ग्रहण कर रहे हैं 22 जनवरी 2024 को अयोध्या उत्तर प्रदेश में भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ जिसमें बहुत से लोग पूरी दुनिया के हिंदू आए और दर्शन किए लेकिन कितने ऐसे लोग हैं जो ईसाई देश छोड़कर भगवान राम जन्म स्थल अयोध्या में रहना चाहते हैं कोई नहीं मतलब राम भगवान है लेकिन राम के देश में रहना नही चाहते, इसलिए ईसाइयों का विरोध ना करें और अपने समाज को और अपने परिवार को आगे बढ़ाएं 

                                                             अरविंद कुमार

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