इतिहास जाने

 

समाज का नंगा सच -इसलिये हिन्दू हिन्दू कर रहे हैं,मूर्ख बना रहे हैं सबको ?
इस पोस्ट को जरुर पढ़ें, लेखक डा0 हीरालाल यादव पीएचडी; इतिहास ; बधाई के पात्र हैं।
🌻🌻🌻
आप सभी बहनों,भाइयों.
से अनुरोध है दो minute
का टाइम निकाल कर ये
पोस्ट जरूर पढें.
अंग्रेजों ने भारत पर 150 वर्षों तक राज किया ब्राह्मणों ने उनको भगाने
का हथियार बन्द
आंदोलन क्यों चलाया?
जबकि भारत पर सबसे पहले हमला मुस्लिम
शासक मीर काशीम ने 712ई. में किया! उसके बाद महमूद गजनबी, मोहम्मद गौरी,चन्गेज खान ने हमला किये और फिर कुतुबदीन ऐबक, गुलाम वंश, तुग्लक वंश, खिल्जी वंश, लोदी वंश
फिर मुगल आदि  वन्शों
ने भारत पर राज किया
और खूब अत्याचार
किये .लेकिन ब्राह्मण ने
कोइ क्रांति या आंदोलन
नही चलाया! फिर
अंग्रेजों के खिलाफ़ ही
क्यो क्रांति कर दी??
जानिये क्रांति और आंदोलन की वजह..
1- अंग्रेजों ने 1795
में अधिनयम 11 द्वारा
शूद्रों को भी सम्पत्ति
रखने का कानून बनाया.
2- 1773 में ईस्ट इंडिया
कम्पनी ने रेगुलेंटिग एक्ट
पास किया जिसमें न्याय
व्यवस्था समानता पर
आधारित थी.6 मई 1775
को इसी कानून द्वारा
बंगाल के सामन्त ब्राह्मण
नन्द कुमार देव को फांसी हुई थी.
3- 1804 अधिनियम 3 द्वारा कन्या हत्या पर रोक अंग्रेजों ने लगाई (लडकियों के पैदा होते ही तालु में अफीम चिपकाकर, माँ के
स्तन पर धतूरे का
लेप लगाकर, एवम्
गढ्ढा बनाकर उसमें दूध डालकर डुबो कर मारा जाता था.
4- 1813 में ब्रिटिश सरकार
ने कानून बनाकर शिक्षा
ग्रहण करने का सभी
जातियों और धर्मों के
लोगों को अधिकार दिया.
5- 1813 में अंग्रेजों ने दास प्रथा
का अंत कानून बनाकर किया.
6- 1817 में समान नागरिक
संहिता कानून बनाया
(1817 के पहले सजा का
प्रावधान वर्ण के आधार
पर था.ब्राह्मण को कोई
सजा नही होती थी और
शूद्र को कठोर दंड दिया
जाता था.अंग्रेजों ने सजा
का प्रावधान समान कर
दिया.)
7- 1819 में अधिनियम 7
द्वारा ब्राह्मणों द्वारा शूद्र
स्त्रियों के शुद्धिकरण पर
रोक लगाई। (शुद्रों की शादी
होने पर दुल्हन को अपने
यानि दूल्हे के घर न जाकर
कम से कम तीन रात ब्राह्मण के घर शारीरिक सेवा देनी पड़ती थी.)
8- 1830 में नरबलि प्रथा पर
रोक ( देवी -देवता को प्रसन्न
करने के लिए ब्राह्मण शुद्रों,
स्त्री व् पुरुष दोनों को मन्दिर
में सिर पटक पटक कर
चढ़ा देता था.)
9- 1833 अधिनियम 87
द्वारा सरकारी सेवा में भेद
भाव पर रोक ..अर्थात
योग्यता ही सेवा का
आधार स्वीकार किया
गया तथा कम्पनी के
अधीन किसी भारतीय
नागरिक को जन्म स्थान,
धर्म, जाति या रंग के
आधार पर पद से वंचित
नहीं रखा जा सकता है.
10-1834 में पहले ^भारतीय विधि आयोग^ का गठन हुआ। कानून
बनाने की व्यवस्था जाति,
वर्ण, धर्म और क्षेत्र की भावना से ऊपर उठकर करना आयोग का प्रमुख उद्देश्य था.
11-1835 प्रथम पुत्र को गंगा दान पर रोक (ब्राह्मणों ने नियम बनाया
की शूद्रों के घर यदि पहला
बच्चा लड़का पैदा हो तो
उसे गंगा में फेंक देना
चाहिये.
पहला पुत्र ह्रष्ट-पृष्ट एवं
स्वस्थ पैदा होता है.यह
बच्चा ब्राह्मणों से लड़ न
पाए इसलिए पैदा होते ही
गंगा को दान करवा देते थे.
12- 7 मार्च 1835 को
लार्ड मैकाले ने शिक्षा
नीति राज्य का विषय
बनाया और उच्च शिक्षा
को अंग्रेजी भाषा का
माध्यम बनाया गया.
13- 1835 को कानून बनाकर अंग्रेजों ने शूद्रों को कुर्सी पर बैठने का अधिकार दिया.
14- दिसम्बर 1829 के
नियम 17 द्वारा विधवाओं
को जलाना अवैध घोषित कर सती प्रथा का अंत किया.
15- देवदासी प्रथा पर
रोक लगाई.ब्राह्मणों के
कहने से शूद्र अपनी
लडकियों को मन्दिर की
सेवा के लिए दान देते थे. मन्दिर के पुजारी उनका
शारीरिक शोषण करते थे.
बच्चा पैदा होने पर उसे
फेंक देते थे.और उस
बच्चे को हरिजन नाम
देते थे.
1921 को जातिवार जनगणना के आंकड़े के अनुसार अकेले मद्रास में कुल जनसंख्या 4 करोड़
23 लाख थी जिसमें 2
लाख देवदासियां मन्दिरों
में पड़ी थी.
यह प्रथा अभी भी दक्षिण भारत के मन्दिरो में चल
रही है.
16- 1837 अधिनियम द्वारा ठगी प्रथा का अंत किया.
17- 1849 में कलकत्ता
में एक बालिका विद्यालय
जे.ई. डी. बेटन ने स्थापित
किया.
18- 1854 में अंग्रेजों ने
3 विश्वविद्यालय कलकत्ता
मद्रास और बॉम्बे में
स्थापित किये. 1902 में
विश्वविद्यालय आयोग
नियुक्त किया गया.
19- 6 अक्टूबर 1860
को अंग्रेजों ने इंडियन
पीनल कोड बनाया.
लार्ड मैकाले ने सदियों
से जकड़े शूद्रों की
जंजीरों को काट दिया
और भारत में जाति, वर्ण
और धर्म के बिना एक
समान क्रिमिनल लॉ
लागू कर दिया.


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