एक महान मिशमरी
डॉ ग्राहम स्टेंस का जन्म 1941 में आस्ट्रेलिया में हुआ था, सन 1965 ईस्वी में 24 साल की उम्र में वो पहली बार भारत आए, इवेंजलिकाल मिशनरी सोसायटी मयूरभंज से जुड़ गए, सन 1983 में ग्राहम स्टेंस ने उड़ीसा के वारीपाड़ा क्षेत्र का कार्यभार संभाला, ग्राहम स्टेंस ने उड़ीसा में 30 साल कुष्ठ रोगियों की सेवा की थी, 22 जनवरी सन 1999 में जिला क्योंझर उड़ीसा में उनके दोनों बेटे फिलिप(10) तिमोथी (7) कहीं घुमाने की जिद करने लगे डॉ ग्राहम स्टेंस ने बच्चो को एक जीप में मयूरभंज घुमाने ले गए दिन में वे एक मसीही प्रोग्राम में हिस्सा लिए शाम को घर लौटने से पहले वे मनोहरपुर गाव में अपना एक कैंप लगा दिया, वहां पर उन्होंने एक चर्च के बाहर खाना पीना खाया और उसी जीप में सो गए, अचानक रात 12 बजे दारा सिंह के संगठन ने डॉ ग्राहम स्टेंस को घेर लिया घेरा बंदी करने वाले लोग हाथ में कुल्हाड़ी और फर्सा लिए थे वे लोग उस जीप को तोड़ फोड़ करते हैं डॉ ग्राहम स्टेंस और उनके बच्चो ने हमलावरों से दया की भीख मागते और गिड़गिड़ाते है लेकिन दारा सिंह के टीम के अंदर इंसानियत न होने के कारण कुछ नहीं सुनते, वे उनको मारते पीटते हैं और जीप पर पेट्रोल छिड़ककर उनको जिंदा जला देते है, इस घटना ने न सिर्फ एक निर्दोष कि हत्या की बल्कि पूरी दुनिया में भारत को झुका दिया।
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