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परमेश्वर न्यायी हैं

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परमेश्वर का धन्यवाद हो कि परमेश्वर का वचन आज बहुत तेजी से पूरी दुनिया में फैल रहा है। इस वचन को रोकने के लिए काफी लंबे समय से शैतान ने पूरी ताकत लगा दी है। सन 2019 में शैतान ने पूरी दुनिया को कोरोनावायरस के द्वारा पूरी दुनिया की कमर तोड़ दी, जिसमें लाखों लोग मारे गए। जिससे मानव जाति का बहुत बड़ा नुकसान हुआ, करोना वायरस ने अमेरिका जैसे मसीही देशों को भी नहीं रख छोड़ा जिसमें 70000 से ज्यादा लोग मारे गए, इस वायरस के कारण लोगों का मानना है कि जब अमेरिका में सबसे ज्यादा मसीही है तो अमेरिका में ही सबसे ज्यादा लोग क्यों मरे, क्या उनका परमेश्वर उनकी इस वायरस से नहीं बचा सकता। आइए जाने कि अमेरिका में सबसे ज्यादा लोग क्यों मरे, जब हम बाइबल पढ़ते हैं और यहुन्ना 3:16 को पढ़ते हैं तो यहां पर हमें मिलता है कि जब परमेश्वर ने अपने पुत्र को इस दुनिया में भेजा तो वह ना किसी विशेष देश, ना किसी विशेष जाति, ना किसी विशेष धर्म के लिए, बल्कि परमेश्वर ने पूरी दुनिया के लिए अपने पुत्र, अर्थात यीशु मसीह को भेजा। यहां हम देखते हैं कि परमेश्वर सब से प्यार करता है और  उसमें कोई भेदभाव नहीं है। दूसरी बात जब हम ...

एक महान मिशमरी

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डॉ ग्राहम स्टेंस का जन्म 1941 में आस्ट्रेलिया में हुआ था, सन 1965 ईस्वी में 24 साल की उम्र में वो पहली बार भारत आए, इवेंजलिकाल मिशनरी सोसायटी मयूरभंज से जुड़ गए, सन 1983 में ग्राहम स्टेंस ने उड़ीसा के  वारीपाड़ा क्षेत्र का कार्यभार संभाला, ग्राहम स्टेंस ने उड़ीसा में 30 साल कुष्ठ रोगियों की सेवा की थी, 22 जनवरी सन 1999 में जिला क्योंझर उड़ीसा में उनके दोनों बेटे फिलिप(10) तिमोथी (7) कहीं घुमाने की जिद करने लगे डॉ ग्राहम स्टेंस ने बच्चो को एक जीप में मयूरभंज घुमाने ले गए दिन में वे एक मसीही प्रोग्राम में हिस्सा लिए शाम को घर लौटने से पहले वे मनोहरपुर गाव में अपना एक कैंप लगा दिया, वहां पर उन्होंने एक चर्च के बाहर खाना पीना खाया और उसी जीप में सो गए, अचानक रात 12 बजे दारा सिंह के संगठन ने डॉ ग्राहम स्टेंस को घेर लिया घेरा बंदी करने वाले लोग हाथ में कुल्हाड़ी और फर्सा लिए थे वे लोग उस जीप को तोड़ फोड़ करते हैं डॉ ग्राहम स्टेंस और उनके बच्चो ने हमलावरों से दया की भीख मागते और गिड़गिड़ाते है लेकिन दारा सिंह के टीम के अंदर इंसानियत न होने के कारण कुछ नहीं सुनते, वे उनको मारते पीटते हैं औ...

एक सच्ची घटना

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  2008 में मेरे बड़े भाई की शादी थी। घर में बड़ी खुशहाली थी, भाई होने के कारण मैं बहुत खुश था, क्योंकि उस दिन मुझे भी नया कपड़ा पहनाया जाता और मैं भी बारात में जाता। मेरे घर के सामने पांच बांस थे और उस पर सरपत के छप्पर बने थे जिसे हमारे गांव में माड़व कहा जाता है। क्योंकि हिंदू धर्म में शादियों में माड़व बनाना शुभ और अनिवार्य है। बीच वाले बांस के बगल में एक सजाई हुई सुंदर हाड़ी रखी थी, शादी का दिन आ गया परिवार में खुशी का माहौल था। बड़े भाई को नहलाकर नए कपड़े पहनाए गए और पूजा-पाठ कराकर बाजा भी बजाया जा रहा था। कपड़े पहनाने के बाद बड़े भाई को नीम का पेड़, पीपल का पेड़ और घर पर रखे हुए देवता की पूजा करा कर शादी को रवाना कर दिया गया। बारात दूसरे गांव पहुंच गई नाचना गाना शुरू हो गया और उसके बाद खाना खाने का समय आया, सब लोग खाना खाने जा रहे थे। उसी समय मेरे पापा की कुछ बहुत पुराने मित्र आए जिस मित्रता को पापा ने कई सालों तक निभाया था। उन मित्रों ने पापा के पास आकर पैसा मांगने लगे और कहने लगे मुझे बाहर जाकर खाना खाना है, पापा ने कहा खाना यहां भी बना है मित्रों ने कहा हम यहां नहीं खा सकते...