एक सच्ची ज्योति

 

भारत हजारों साल से गुलाम रहा है इस गुलामी ने ना सिर्फ हमें शारीरिक दुख पहुंचाया है बल्कि हमें मानसिक रीति से भी गुलाम बनाया है ना सिर्फ हमें मानसिक रीति से गुलाम बनाया है बल्कि हमें रीति-रिवाजों में भी गुलाम बनाया है और इस गुलामी ने हमारी इतनी आजादी छीन ली कि हम पढ़ नहीं सकते थे,हम समाज में बोल नहीं सकते थे, हम समाज में स्वतंत्र रूप से रह नहीं सकते थे, हम अपने मन से अपने ईश्वर का भी चुनाव नहीं कर सकते थे, यह गुलामी इतनी भयानक थी कि आने वाली पीढ़ी को बिना बताए भी गुलामी में कैसे रहना है जान सकता था। आखिर इतनी बड़ी गुलामी से हम आज छुटकारा पाएं कैसे वह कौन इंसान है जो इतना बड़ा बलिदान किया इस समाज के लिए इस गुलामी के लिए, आइए जाने।14 अप्रैल सन 1891 (महू) मध्य प्रदेश में डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का जन्म होता है, थोड़ा बड़े होने के बाद 7 नवंबर सन 1900 को डॉ आंबेडकर ने सातारा शहर में राजवाड़ा चौक पर स्थित गवर्नमेंट हाई स्कूल में अंग्रेजी की पहली कक्षा में प्रवेश लिया 1913 में डॉक्टर अंबेडकर 22 साल की आयु में कोलंबिया विश्वविद्यालय में पीएचडी की शिक्षा प्राप्त करने चले गए 1916 में डॉक्टर अंबेडकर कोलंबिया विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी प्राप्त करने वाले प्रथम अछूत थे, डॉक्टर अंबेडकर ने अपने जीवन में बहुत डिग्रियां प्राप्त की लेकिन खेद की बात यह है कि उनकी योग्यता और प्रसिद्धि ने हिंदू समाज में उन्हें सम्मान नहीं दिया। डॉक्टर अंबेडकर ने न सिर्फ समाज में फैली बुराइयों को का अंत किया बल्कि भारत में पिछड़ी जाति और गरीब जनता के लिए 1942 में सरकारी संस्थानों और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण की मांग उठाई 26 जनवरी 1950 को जब संविधान लागू हुआ उस संविधान में SC, ST, OBC के लोगों को विशेष आरक्षण दिया गया आज जितने भी पिछड़ी जाति के लोग नौकरी कर रहे हैं वह सिर्फ संविधान और आरक्षण के कारण ही है आज भले ही लोगों के घर में संविधान ना हो भले ही लोग संविधान ना पड़े भले ही लोग संविधान की इज्जत ना करें लेकिन सच्चाई यह है कि संविधान ने और डॉक्टर अंबेडकर ने समाज को एक बड़ी सहायता दी है इसलिए हमें संविधान पढ़ना चाहिए।एक और सच्ची घटना आज से 2000 साल पहले घटी थी, इजराइल देश में बैतलहम गांव में एक बालक का जन्म होता है जिसका नाम यीशु रखा जाता है, बाइबल के अनुसार यीशु सारे जगत का पाप उठा ले जाता है। आइए जानें पाप क्या है, अपने जीवन में हम बहुत सारी गलतियां करते हैं जैसे झूठ बोलना, चोरी करना, हत्या करना, व्यभिचार करना, मूर्ति पूजा करना ऐसे बहुत से पाप हैं जो हम दिन प्रतिदिन करते हैं लेकिन यह पाप है हम कैसे जाने। जैसे जब हम बिना हेलमेट के गाड़ी चलाते हैं और पुलिस पकड़ लेती है और हम जुर्माना देते हैं तब हमको पता चलता है कि बिना हेलमेट के गाड़ी चलाना अपराध है ऐसे ही अपराधों को जानने के लिए सरकार के यातायात नियमों के बारे में पढ़ना होगा तब आपको पता चलेगा की कैसे चलना है वैसे जब हम बाइबल पढ़ते है तब हमको पता चलता है की चोरी करना, झूठ बोलना, व्यभिचार करना यह सब जब हम करते है तो पापी हो जाते है। बाइबल के अनुसार यीशु मसीह पापियों के लिए मरा, बाइबल के अनुसार यीशु मसीह किसी विशेष धर्म, किसी विशेष देश के अपने आपको दे दिया,जैसा लिखा युहन्ना 3:16. क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा की उसने अपना इकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो परंतु अनंत जीवन पाए। बाइबल के अनुसार जो पाप हमने किया उसका दंड हमे न मिलकर यीशु ने वह दंड उठाया और हमे छुटकारा दिया और हमे अब उस पर विश्वास करना है और मुंह से अंगीकार करना है जिससे हम और हमारा घराना उद्धार पा सकता है। खुशी की बात यह की यीशु न सिर्फ हमे अनंत जीवन देता है बल्कि हजारों साल की गुलामी और रीति रिवाज से आजादी देता है। आज भले ही लोग यीशु को न माने और बाइबल को न पढ़े ,लेकिन सच्चाई यह की यीशु हम सबके लिए मरा जिससे हम सब स्वतंत्रता का जीवन प्राप्त कर पाए है इसीलिए हमे परमेश्वर को धन्यवाद देना चाहिए और पवित्र बाइबल को पढ़ना , जय यीशु।


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