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पंडिता रमाबाई

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 पंडिता रमाबाई का जन्म 23 अप्रैल 1858 को संस्कृत  विद्वान अनंत शास्त्री डोंगरे के घर हुआ। और माता का नाम लक्ष्मीबाई डोंगरे था। मेरे पिताजी एक रूढ़िवादी हिंदू थे और जातिवाद और अन्य धार्मिक सिद्धांतों को दृढ़ता से मानते थे लेकिन फिर भी वह अपने आप में एक सुधारक थे वह यह नहीं समझ पाए कि शूद्र जाति के लोग और महिलाएं संस्कृत पढ़ना और लिखना क्यों नहीं सीख सकते, और वे वेदों के अलावा कोई अन्य धार्मिक पवित्र साहित्य क्यों नहीं सीख सकते उन्होंने सोचा कि बाहरी लोगों के बीच प्रचार करने से अच्छा है कि घर में ही यह प्रयोग किया जाए मेरी माता जी उनकी इस योजना में खरी उतरी जिसके फलस्वरूप मेरी माता जी एक श्रेष्ठ संस्कृत विद्वान बन गई घर के वह सारे काम जो एक अच्छी धार्मिक पत्नी व मां को करने चाहिए और वह करती रही जैसे कि कपड़े धोना खाना पकाना अन्य पारिवारिक कार्य, बच्चों की देखभाल अतिथि की प्रणाली इत्यादि रात का अपना समय व निष्ठापूर्वक पवित्र पौराणिक साहित्य के नियमित अभ्यास में व्यतीत करती जिसके फलस्वरूप बहुत सा ज्ञान उनके मन में मस्तिष्क में समा गया। बैंगलोर जिले में पिताजी के गांव के पास रहने व...